शी जिनपिंग ने बांग्लादेश को दिया संप्रभुता और निवेश सहयोग का समर्थन
बीजिंग में हुई अहम शिखर बैठक
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बीजिंग में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश की राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए कहा कि चीन किसी भी प्रकार के “विदेशी हस्तक्षेप” का विरोध करता है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब फरवरी 2026 में नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान पहली बार चीन की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। उनकी यह पांच दिवसीय यात्रा मलेशिया से शुरू होकर चीन के डालियान और फिर बीजिंग तक पहुंची।
शी जिनपिंग ने क्या कहा?
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया में चाहे जितने भी बदलाव आएं, चीन-बांग्लादेश मित्रता की दिशा नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि चीन बांग्लादेश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रयासों का समर्थन करता है तथा किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है।
शी ने यह भी कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाली बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं के माध्यम से बांग्लादेश के साथ विकास साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
13 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर
प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों ने 13 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौतों में मुख्य क्षेत्र शामिल हैं:
- व्यापार
- निवेश
- शिक्षा
- औद्योगिक सहयोग
- बुनियादी ढांचा
- तकनीकी सहयोग
- मानव संसाधन विकास
इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देना है।
बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं को मिलेगा नया बल
चीन ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह बांग्लादेश के साथ Belt and Road Initiative (BRI) के तहत सहयोग बढ़ाएगा।
BRI की शुरुआत वर्ष 2013 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। इसका उद्देश्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप को रेलवे, बंदरगाह, सड़क, ऊर्जा पाइपलाइन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ना है।
चीन के अनुसार अब तक 150 से अधिक देशों और 30 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने BRI सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं।
नया चीन–म्यांमार–बांग्लादेश आर्थिक गलियारा
शी जिनपिंग ने चीन–म्यांमार–बांग्लादेश आर्थिक गलियारा (China-Myanmar-Bangladesh Economic Corridor) विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

यह प्रस्ताव पहले प्रस्तावित Bangladesh-China-India-Myanmar (BCIM) Economic Corridor का नया रूप माना जा रहा है। BCIM परियोजना 2013 में प्रस्तावित हुई थी, लेकिन भारत की सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं सहित विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी।
नया गलियारा क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और संपर्क बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।
तीस्ता नदी परियोजना पर बढ़ा सहयोग
बैठक के दौरान दोनों देशों ने तीस्ता नदी प्रबंधन एवं पुनर्वास परियोजना पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग और बांग्लादेशी प्रतिनिधियों के बीच भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई।
तीस्ता नदी:
- पूर्वी हिमालय से निकलती है।
- सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है।
- इसके बाद बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
- लाखों किसानों की सिंचाई और आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तीस्ता?
विश्लेषकों के अनुसार तीस्ता परियोजना भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Chicken’s Neck) के निकट स्थित है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर लगभग 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी है जो भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है।
हालांकि चीन ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि तीस्ता परियोजना पूरी तरह लोगों के जीवन स्तर में सुधार से जुड़ी विकास परियोजना है।
बांग्लादेश ने दोहराया ‘वन चाइना‘ समर्थन
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश वन चाइना नीति का पूरी तरह समर्थन करता है।
उन्होंने कहा:
- ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है।
- बांग्लादेश किसी भी प्रकार की “ताइवान स्वतंत्रता” का समर्थन नहीं करता।
- चीन बांग्लादेश का विश्वसनीय और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
चटगांव और मोंगला बंदरगाहों का होगा आधुनिकीकरण
बैठक में चीन ने चटगांव (Chattogram) और मोंगला (Mongla) बंदरगाहों के आधुनिकीकरण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
बांग्लादेश सरकार का उद्देश्य इन बंदरगाहों को क्षेत्रीय व्यापारिक केंद्र (Regional Hub) के रूप में विकसित करना है ताकि भविष्य में पड़ोसी देशों को भी इनका लाभ मिल सके।
नई ‘2+2 संवाद व्यवस्था‘ पर सहमति
दोनों देशों ने पहली बार 2+2 Dialogue Mechanism शुरू करने पर सहमति बनाई।
इस व्यवस्था के तहत:
- विदेश मंत्रालय
- रक्षा मंत्रालय
के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रणनीतिक बैठकें करेंगे।
यह कदम दोनों देशों के सुरक्षा और रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
बांग्लादेश सरकार ने शिक्षा प्रणाली में मंदारिन भाषा को तीसरी विदेशी भाषा के रूप में बढ़ावा देने की योजना बनाई है।
इसके अलावा:
- तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में सहयोग
- चीन की सहायता से अस्पताल निर्माण
- चीनी शहर कुनमिंग सहित अन्य अस्पतालों में इलाज के लिए वीजा प्रक्रिया आसान बनाने का अनुरोध
भी वार्ता का हिस्सा रहे।
BRICS सदस्यता पर चीन का समर्थन
बैठक के दौरान बांग्लादेश ने भविष्य में BRICS की सदस्यता लेने की अपनी इच्छा दोहराई।
चीन ने कहा कि यदि बांग्लादेश भविष्य में औपचारिक आवेदन करता है तो वह उसका स्वागत करेगा।
वर्तमान में BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं और संगठन वैश्विक दक्षिण (Global South) के आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
विश्व आर्थिक मंच में निवेश का आह्वान
बीजिंग पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन के डालियान शहर में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की बैठक में हिस्सा लिया।
उन्होंने चीनी कंपनियों से:
- विनिर्माण
- ऊर्जा
- डिजिटल तकनीक
- औद्योगिक पार्क
- बुनियादी ढांचे
में निवेश बढ़ाने की अपील की।
चीन–बांग्लादेश व्यापारिक संबंध
चीन कई वर्षों से बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
मुख्य तथ्य:
- द्विपक्षीय व्यापार 2024 में लगभग 24–25 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास रहा।
- बांग्लादेश का अधिकांश औद्योगिक कच्चा माल और मशीनरी चीन से आयात होती है।
- चीन बांग्लादेश के अवसंरचना, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में सबसे बड़े निवेशकों में शामिल है।
दक्षिण एशिया की राजनीति में क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। चीन अब बांग्लादेश के साथ बुनियादी ढांचा, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना चाहता है।
वहीं, तीस्ता परियोजना, बंदरगाहों का विकास और नए आर्थिक गलियारे जैसे मुद्दों पर भारत की भी रणनीतिक रुचि बनी रहेगी। हालांकि चीन ने स्पष्ट किया है कि उसका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, फिर भी दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Quick Facts)
| तथ्य | जानकारी |
| बैठक का स्थान | बीजिंग, चीन |
| चीनी राष्ट्रपति | शी जिनपिंग |
| बांग्लादेश के प्रधानमंत्री | तारिक रहमान |
| हस्ताक्षरित समझौते | 13 MoUs |
| नया प्रस्ताव | चीन-म्यांमार-बांग्लादेश आर्थिक गलियारा |
| नई व्यवस्था | 2+2 विदेश एवं रक्षा संवाद |
| प्रमुख नदी परियोजना | तीस्ता नदी प्रबंधन |
| बंदरगाह सहयोग | चटगांव और मोंगला |
| शिक्षा सहयोग | मंदारिन भाषा और तकनीकी शिक्षा |
| BRICS | चीन ने भविष्य की सदस्यता का समर्थन किया |
प्रामाणिक एवं आधिकारिक स्रोत
- चीन का विदेश मंत्रालय
- बांग्लादेश प्रधानमंत्री कार्यालय
- बांग्लादेश समाचार एजेंसी (BSS)
- विश्व आर्थिक मंच (WEF)
- BRICS आधिकारिक वेबसाइट
- प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI)
