रिसर्च गुणवत्ता पर बड़ा सवाल-पेटेंट और डिजाइन रजिस्ट्रेशन का अंतर
पेटेंट क्या है और इसका उद्देश्य क्या होता है?
पेटेंट (Patent) एक बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right – IPR) है, जो किसी नई तकनीक, उत्पाद, प्रक्रिया या वैज्ञानिक आविष्कार (Invention) के आविष्कारक को सीमित अवधि के लिए विशेष (Exclusive) अधिकार देता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा वर्षों की मेहनत और अनुसंधान से विकसित की गई तकनीक की बिना अनुमति नकल न हो।
भारत में पेटेंट का संरक्षण पेटेंट अधिनियम, 1970 (Patents Act, 1970) के अंतर्गत किया जाता है, जिसका प्रशासन Controller General of Patents, Designs & Trade Marks (CGPDTM) द्वारा किया जाता है।
पेटेंट मिलने के लिए किन शर्तों का पूरा होना जरूरी है?
किसी विचार (Idea) को केवल सोच लेने से पेटेंट नहीं मिल जाता। पेटेंट तभी दिया जाता है जब आविष्कार निम्न तीन प्रमुख शर्तों को पूरा करे:
1. नवीनता (Novelty)
आविष्कार पूरी दुनिया में पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होना चाहिए।
2. आविष्कारात्मक कदम (Inventive Step)
आविष्कार सामान्य तकनीकी जानकारी से अलग और स्पष्ट रूप से नया होना चाहिए।
3. औद्योगिक उपयोगिता (Industrial Applicability)
उस तकनीक या उत्पाद का वास्तविक उद्योगों में उपयोग संभव होना चाहिए।
इन सभी बिंदुओं की विस्तृत तकनीकी जांच (Examination) की जाती है। यदि समान पेटेंट पहले से मौजूद है तो नया पेटेंट नहीं दिया जाता।
डिजाइन रजिस्ट्रेशन क्या होता है?
डिजाइन रजिस्ट्रेशन किसी उत्पाद की बाहरी बनावट (Appearance) को सुरक्षा प्रदान करता है।
इसमें उत्पाद की:
- आकृति (Shape)
- पैटर्न (Pattern)
- कॉन्फ़िगरेशन
- सजावट (Ornamentation)
- रंगों का संयोजन
को संरक्षण मिलता है, न कि उसके पीछे की तकनीक को।
उदाहरण के लिए यदि किसी कंपनी ने पानी शुद्ध करने वाली नई मशीन बनाई है, तो मशीन के अंदर की तकनीक पेटेंट से सुरक्षित होगी जबकि मशीन का आकर्षक बाहरी डिज़ाइन Design Registration के अंतर्गत सुरक्षित हो सकता है।
यह संरक्षण Designs Act, 2000 के तहत दिया जाता है, न कि Patents Act के अंतर्गत।
क्या डिजाइन रजिस्ट्रेशन में जांच नहीं होती?
सोशल मीडिया और कई चर्चाओं में यह दावा किया जाता है कि डिजाइन रजिस्ट्रेशन लगभग बिना जांच के मिल जाता है। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।
वास्तविकता यह है कि Designs Act, 2000 के अनुसार डिजाइन का नया (New) या मौलिक (Original) होना आवश्यक है। यदि वही डिजाइन पहले से प्रकाशित या पंजीकृत है, तो उसका पंजीकरण अस्वीकार किया जा सकता है। आवेदन की परीक्षा (Examination) भी की जाती है, हालांकि इसकी प्रकृति पेटेंट परीक्षा से अलग और अपेक्षाकृत सरल होती है।
पेटेंट और डिजाइन रजिस्ट्रेशन में मुख्य अंतर
| पेटेंट | डिजाइन रजिस्ट्रेशन |
| तकनीक और कार्यप्रणाली की सुरक्षा | केवल बाहरी डिजाइन की सुरक्षा |
| Patents Act, 1970 के अंतर्गत | Designs Act, 2000 के अंतर्गत |
| विस्तृत तकनीकी जांच | डिजाइन संबंधी परीक्षा |
| नवीन तकनीकी समाधान आवश्यक | नया एवं मौलिक दृश्य डिजाइन आवश्यक |
| वैज्ञानिक आविष्कार का संरक्षण | उत्पाद के दृश्य स्वरूप का संरक्षण |
रिसर्च में डिजाइन रजिस्ट्रेशन को पेटेंट बताने का विवाद
हाल के वर्षों में कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कुछ शैक्षणिक संस्थान और निजी विश्वविद्यालय डिजाइन रजिस्ट्रेशन को भी “पेटेंट उपलब्धि” के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इससे संस्थानों के:
- शोध प्रदर्शन
- रैंकिंग
- प्रचार
- फैकल्टी प्रमोशन
पर सकारात्मक प्रभाव दिखाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि केवल डिजाइन रजिस्ट्रेशन होना किसी तकनीकी नवाचार (Innovation) का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
क्या केवल पेटेंट आवेदन करना ही उपलब्धि है?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल Patent Filing किसी संस्थान की नवाचार क्षमता का प्रमाण नहीं होती।
असल महत्व होता है:
- कितने पेटेंट स्वीकृत हुए,
- कितने उद्योग में उपयोग हुए,
- कितनी तकनीक बाज़ार तक पहुँची,
- कितने उत्पाद विकसित हुए।
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) भी लगातार इस बात पर जोर देता है कि पेटेंट का उद्देश्य वास्तविक नवाचार को बढ़ावा देना है, केवल आवेदन संख्या बढ़ाना नहीं।
भारत में पेटेंट प्रणाली की वर्तमान स्थिति
भारत में पिछले कुछ वर्षों में पेटेंट आवेदन लगातार बढ़े हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई पेटेंट फाइलिंग अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फाइलिंग और ग्रांट (Patent Grant) दोनों अलग–अलग चरण हैं, इसलिए केवल आवेदन संख्या को शोध गुणवत्ता का पैमाना नहीं माना जा सकता। पेटेंट आवेदन की जांच कई चरणों से गुजरती है और स्वीकृति में समय लग सकता है।
ध्यान दें: सोशल मीडिया पर प्रचलित यह दावा कि “सिर्फ 2% पेटेंट आवेदन ही स्वीकृत होते हैं”, सभी वर्षों और सभी श्रेणियों पर लागू आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। विभिन्न वर्षों और तकनीकी क्षेत्रों में स्वीकृति दर अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इस दावे को सार्वभौमिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
फर्जी या भ्रामक पेटेंट दावों से क्या नुकसान हो सकता है?
यदि कोई संस्था डिजाइन रजिस्ट्रेशन को पेटेंट बताकर प्रचार करती है तो इसके कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं:
- छात्रों को भ्रमित करना
- रिसर्च गुणवत्ता में गिरावट
- विश्वविद्यालयों की विश्वसनीयता कम होना
- सरकारी संसाधनों का गलत उपयोग
- भारत की वैश्विक शोध छवि पर असर
विशेषज्ञों की प्रमुख सिफारिशें
विशेषज्ञ निम्न सुधारों की सिफारिश करते हैं:
- प्रत्येक विश्वविद्यालय में IP Verification Committee बनाई जाए।
- केवल स्वीकृत (Granted) पेटेंट को ही शोध उपलब्धि माना जाए।
- डिजाइन रजिस्ट्रेशन और पेटेंट को अलग-अलग श्रेणियों में प्रस्तुत किया जाए।
- फर्जी दावों पर कार्रवाई की जाए।
- शोध मूल्यांकन में संख्या नहीं बल्कि गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाए।
- उद्योग में उपयोग होने वाले नवाचारों को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए।
सूचनिका 365 इनसाइट्स
पेटेंट और डिजाइन रजिस्ट्रेशन दोनों बौद्धिक संपदा अधिकार हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। पेटेंट किसी तकनीकी आविष्कार की सुरक्षा देता है, जबकि डिजाइन रजिस्ट्रेशन केवल उत्पाद की बाहरी बनावट की रक्षा करता है।
यदि दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं रखा गया, तो शोध की वास्तविक गुणवत्ता पर प्रश्न उठ सकते हैं। भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसलिए आवश्यक है कि शोध संस्थान सिर्फ संख्या बढ़ाने के बजाय वास्तविक वैज्ञानिक नवाचार और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान पर ध्यान दें।
विश्वसनीय स्रोत
- Intellectual Property India (CGPDTM)
- Patents Act, 1970
- Designs Act, 2000
- WIPO (World Intellectual Property Organization)
- Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT)
