ओडिशा में कोयले से अमोनियम नाइट्रेट बनेगा
झारसुगुड़ा में शुरू हुई कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और कोयले के आधुनिक उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में देश की पहली व्यावसायिक स्तर की कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट (Coal-to-Ammonium Nitrate) परियोजना का शिलान्यास किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून 2026 को रखी।
करीब ₹25,016 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भारत के कोयला क्षेत्र और रासायनिक उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इसका उद्देश्य देश के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग करते हुए अमोनियम नाइट्रेट जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है।
आखिर क्या है यह कोयला–से–अमोनियम नाइट्रेट परियोजना?
यह परियोजना कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैसीकरण (Coal Gasification) तकनीक के माध्यम से उपयोग में लाएगी। इस प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस (Syngas) में बदला जाता है। इसके बाद इस गैस का उपयोग अमोनिया और अंततः अमोनियम नाइट्रेट बनाने में किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कोयला गैसीकरण पारंपरिक कोयला उपयोग की तुलना में अधिक मूल्यवर्धित उत्पाद देता है। इससे कोयले से केवल बिजली ही नहीं बल्कि उर्वरक, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं।
परियोजना कहां स्थापित की जा रही है?
यह परियोजना ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर क्षेत्र में स्थापित की जा रही है। यह इलाका महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के इब वैली कोयला क्षेत्र के निकट स्थित है, जहां पर्याप्त कोयला उपलब्ध है।
परियोजना के लिए लगभग 350 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। निकटवर्ती कोयला वाशरी से धुले हुए कोयले और कोयला अवशेषों की आपूर्ति की जाएगी, जिससे कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
कौन कर रहा है परियोजना का विकास?
इस परियोजना का विकास भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) द्वारा किया जा रहा है।
BCGCL एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है जिसमें:
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की 51% हिस्सेदारी है।
- भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की 49% हिस्सेदारी है।
यह साझेदारी कोयला संसाधनों और स्वदेशी तकनीक दोनों का लाभ उठाने के लिए बनाई गई है। BHEL अपनी स्वदेशी विकसित गैसीकरण तकनीक उपलब्ध करा रहा है जबकि Coal India कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
अमोनियम नाइट्रेट क्या होता है?
अमोनियम नाइट्रेट एक महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र NH₄NO₃ होता है।
यह दुनिया भर में कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
अमोनियम नाइट्रेट में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह एक प्रभावी उर्वरक माना जाता है। इसके अलावा यह खनन, सड़क निर्माण, सुरंग निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नियंत्रित विस्फोटकों के निर्माण में भी उपयोग होता है।
भारत में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, विशेषकर खनन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में। इसी कारण सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
भारत को इस परियोजना की आवश्यकता क्यों है?
भारत अभी भी कई औद्योगिक रसायनों और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। अमोनियम नाइट्रेट भी उनमें से एक महत्वपूर्ण उत्पाद है।
इस परियोजना से:
- आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- घरेलू उद्योगों को स्थिर आपूर्ति मिलेगी।
- कोयले का मूल्यवर्धित उपयोग बढ़ेगा।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।
सरकार का मानना है कि कोयले के गैसीकरण से देश के ऊर्जा और रासायनिक क्षेत्र को नया आयाम मिलेगा।
प्रतिदिन कितना उत्पादन होगा?
परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद यहां प्रतिदिन लगभग 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन होने की संभावना है।
वार्षिक स्तर पर यह क्षमता लगभग 6.6 लाख टन (0.66 MTPA) तक पहुंच सकती है। यह भारत के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
इस परियोजना से झारसुगुड़ा और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
निर्माण चरण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि परियोजना शुरू होने के बाद संचालन, रखरखाव, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों में भी रोजगार उत्पन्न होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूरे पश्चिमी ओडिशा क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।
कोयला गैसीकरण मिशन से जुड़ा है यह प्रोजेक्ट
भारत सरकार ने राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (National Coal Gasification Mission) के तहत वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखा है।
इस मिशन का उद्देश्य कोयले को केवल ईंधन के रूप में नहीं बल्कि रासायनिक उद्योग के कच्चे माल के रूप में उपयोग करना है।
लखनपुर परियोजना इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है क्योंकि यह देश की पहली व्यावसायिक स्तर की Coal-to-Ammonium Nitrate परियोजना है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से क्या है महत्व?
हालांकि कोयला पारंपरिक रूप से प्रदूषण से जुड़ा ईंधन माना जाता है, लेकिन गैसीकरण तकनीक इसके उपयोग को अधिक कुशल और नियंत्रित बनाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गैसीकरण प्रक्रिया से कोयले का बेहतर उपयोग संभव होता है और इससे कई मूल्यवान उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं। साथ ही भविष्य में कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों को भी इसमें जोड़ा जा सकता है।
हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि परियोजना के संचालन के दौरान उत्सर्जन और जल उपयोग की नियमित निगरानी भी आवश्यक होगी ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
केंद्रीय कोयला मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना देश में स्वदेशी तकनीक आधारित कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देगी और कोयले को उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों में बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
सूचनिका 365 इनसाइट्स
ओडिशा के लखनपुर में शुरू हुई कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ₹25,000 करोड़ से अधिक के निवेश वाली यह परियोजना कोयले के आधुनिक उपयोग, आयात में कमी, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई दिशा दे सकती है।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत में कोयला गैसीकरण आधारित कई अन्य परियोजनाओं का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है। इससे देश के विशाल कोयला भंडार का अधिक वैज्ञानिक और आर्थिक उपयोग संभव होगा तथा भारत वैश्विक रासायनिक उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
प्रामाणिक एवं आधिकारिक स्रोत
- Press Information Bureau (PIB) – Coal Ministry Release
- Ministry of Coal, Government of India
- BCGCL Official Website
- Coal India Limited
- BHEL Official Website
